गुरुवार, 8 दिसंबर 2022

कुंडली में सप्तम भाव , सप्तमेश , अन्य शुभ ग्रहों का पाप प्रभाव में होना , कमजोर होना , पीड़ित होने पर नही मिलता विवाह का सुख।

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 कुंडली में सप्तम भाव , सप्तमेश , अन्य शुभ ग्रहों का पाप प्रभाव में होना , कमजोर होना , पीड़ित होने पर नही मिलता विवाह का सुख।


       ✡️🚩 कुंडली के अनुसार 🚩✡️

           🎯 कब होगा विवाह..? 🎯

     ♥️ कैसा रहेगा वैवाहिक जीवन..? ♥️


🎯 जन्मकुंडली का 7वां भाव और इस भाव का स्वामी शादी के लिए जिम्मेदार होता है साथ ही वैवाहिक सुख के कारक ग्रह शुक्र(लड़के के लिए) और गुरु(लड़की के लिए) है।


🎯 जब सप्तम भाव का स्वामी, सप्तम भाव और कारक गुरु/शुक्र बलवान होकर पाप ग्रहो से मुक्त होते है तब वैवाहिक जीवन खुशहाल और अच्छा रहता है।


🎯 सप्तम भाव का स्वामी और शुक्र गुरु केंद्र या त्रिकोण स्थान में बैठे होते है साथ ही अस्त न हो, पीड़ित न हुए हो तब वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है और सही उम्र में जातक/जातिका का विवाह हो जाता है।


🎯 इसके विपरीत सप्तम भाव और सप्तमेश पाप ग्रहो से पीड़ित हो गए हो, अस्त हो गए हो, 6, 8, 12वे भाव में हो तब विवाह होने में दिक्कते आती है या विवाह बहुत देर से दिक्कतो के बाद होता है।


🎯 आचार्य आनन्द जालान के अनुसार सप्तमेश(सप्तम भाव के स्वामी) या शुक्र(लड़के की कुंडली में) गुरु(लड़की की कुंडली में) अस्त नीच पीड़ित होगा या पाप ग्रहो या अस्त ग्रहो से सम्बन्ध बनाएगा तब शादी होने में काफी दिक्कते आती है और विवाह संबंधी ग्रहो की स्थिति ज्यादा ही ख़राब हो तब विवाह हो पाना भी मुश्किल होता और यदि हो भी जाता है तब विवाह सुख कुछ खास सही तरह से नही मिलता।


🎯 ऐसी स्थिति में विवाह सम्बंधित ग्रहो को उपाय से बल देने और जो भी ग्रह शादी में या शादी होने समस्या कर रहे हो उनकी शांति कराना ही सबसे बढ़िया उपाय होता है।


🎯 सप्तम भाव और सप्तमेश और कारक ग्रह गुरु/शुक्र जितना ज्यादा बढ़िया स्थिति में होगा उतना ही वैवाहिक जीवन बढ़िया और सुखद रहता है साथ ही विवाह की सही उम्र में हो जाता है। 


🎯 अब बात करते है सप्तम भाव / भावेश और कारक ग्रहो में से एक भी पीड़ित या ख़राब स्थिति में हो तब वैवाहिक जीवन और विवाह पर क्या असर पड़ता है ?


🎯 आचार्य आनन्द जालान के अनुसार सप्तम भाव या सप्तमेश पीड़ित हो , या सप्तमेश अस्त हो गया हो , या पाप ग्रहो से युक्त हो लेकिन कारक ग्रह शुक्र (लड़के की कुंडली में) गुरु (लड़की की कुंडली में) बलवान और शुभ स्थिति में हो तब जीवनसाथी का सहयोग तो बना रहता है लेकिन सप्तम भाव या सप्तम भाव के स्वामी की स्थिति ख़राब हो तब वैवाहिक जीवन का जो सुख मिलना चाहिए या वैवाहिक जीवन जो खुशहाल रहना चाहिए वह नही रह पाता ।


🎯 क्योंकि पति या पत्नी सुख का कारक ग्रह गुरु या शुक्र अच्छी स्थिति में होने पर जीवनसाथी का सहयोग तो मिलेगा या यह कहे जीवनसाथी की ओर से वैवाहिक सुख और सहयोग में कोई दिक्कत नहीं रहेगी लेकिन सप्तमेश या सप्तम भाव पीड़ित हो तब वैवाहिक सुख ठीक तरह से नही मिल पायेगा ।  


🎯 दोनों किसी न किसी कारण वश एक दूसरे से दूर रहेंगे या ऐसी स्थिति होगी कि वैवाहिक सुख में बाधाए बनी रहेगी लेकिन कारक ग्रह के सही होने से जीवनसाथी सहयोगी और प्यार करने वाला होगा।


🎯 इसी तरह सप्तम भाव/सप्तमेश ठीक हो और गुरु/शुक्र कारक ग्रह ठीक अवस्था में न हो पीड़ित आदि जैसी अवस्था में हो तब जीवनसाथी के ही सुख और सहयोग में कमी रहती है लेकिन शादी चलती रहती है।


🎯 पूरी तरह से दाम्पत्य जीवन का सुख तब ही अच्छा होता है जब सप्तम भाव, सप्तम भाव का स्वामी और कारक ग्रह शुक्र/गुरु बलवान और शुभ स्थिति में होते है।

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आचार्य आनन्द जालान

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