सर्वप्रथम किसी दिन स्वच्छ होकर घर के मुख्य द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगालें जिससे कि उनका मुँह घर के अन्दर की ओर हो । अब किसी भी पूर्णिमा से चन्द्र अथवा बुध की होरा तथा नक्षत्र में यह सरल प्रयोग प्रारम्भ करके प्रतिदिन करते रहें। घर के बाहर कहीं से स्वच्छ दूब घास के पाँच टुकड़े तोड लाएं। इन्हें धोकर मुख्य द्वार पर स्थित गणेश जी के चित्र पर से चढ़ा दें । साथ ही यथाश्रद्धा पुष्प, धूप-दीप आदि भी अर्पण करें। घर से बाहर किसी रुके हुए कार्य के लिए जब भी जाना हो तो दूब का एक टुकड़ा चित्र पर से उठाकर अपनी जेब अथवा पर्स आदि में रखकर साथ ले आएं। गणपति भगवान आपका कार्य अवश्य ही सिद्ध करेंगे। प्रयोग में आए दूब के टुकड़े को बाहर ही फेंककर आया करें । दूब के टुकड़े के साथ-साथ गणेश जी की आँखों में एकटक झाँकते रहें । दीन होकर उनसे अपने कार्य सिद्धि की प्रार्थना करें । लगातार देखते रहने से आँसू निकलने लगे तो उन्हें बहने दें। आँसू निकलने से आपकी प्रार्थना आपके अन्तर्मन से आना प्रारम्भ होगी। और ऐसा कभी हो ही नहीं सकता कि प्रभु आपके अन्तर्मन की प्रार्थना को न सुनें ।
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