मंगलवार, 31 जुलाई 2018

।। आज का राशिफल ।। 01 अगस्त 2018 ।।

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।। आज का राशिफल ।। 01 अगस्त 2018 ।।
पंडित आशीष त्रिपाठी


🐏 *राशि फलादेश मेष* :-
आकस्मिक व्यय से तनाव रहेगा। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। विवेक से कार्य करें। स्थानीय धर्मस्थल की परिवार के साथ यात्रा होगी। पार्टनर से मतभेद समाप्त होगा। नौकरी में अधिकारी का सहयोग तथा विश्वास मिलेगा। पारिवारिक व्यस्तता रहेगी।

🐂 *राशि फलादेश वृष* :-
लेनदारी वसूल होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। शत्रु भय रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में ग्राहकी अच्छी रहेगी। नौकरी में कार्य व्यवहार, ईमानदारी की प्रशंसा होगी। मशक्कत करने से लाभ होगा। चिंता होगी। शत्रु पराजित होंगे।

👫 *राशि फलादेश मिथुन* :-
कारोबारी नए अनुबंध होंगे। नई योजना बनेगी। मान-सम्मान मिलेगा। वाणी पर नियंत्रण रखें। स्त्री कष्ट संभव। कलह से बचें। कार्य में सफलता, शत्रु पराजित होंगे। विवेक से कार्य बनेंगे। पेट रोग से ‍पीड़ित होने की संभावना। वस्त्राभूषण की प्राप्ति के योग।

🦀 *राशि फलादेश कर्क* :-
यात्रा सफल रहेगी। विवाद न करें। लेन-देन में सावधानी रखें। कानूनी बाधा दूर होगी। देव दर्शन होंगे। राज्य से लाभ होने की संभावना। मातृपक्ष की चिंता। वाहन-मशीनरी का प्रयोग सावधानी से करें। धनागम की संभावना। मित्र मिलेंगे। विवाद न करें।

🦁 *राशि फलादेश सिंह* :-
प्रेम-प्रसंग में जोखिम न लें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। झंझटों में न पड़ें। आगे बढ़ने के मार्ग मिलने की संभावना। शत्रु पराजित होंगे। लाभ होगा। स्वास्थ्य ठीक न हो। अनजाना भय सताएगा। राज्य से लाभ। शत्रु शांत होंगे।

👱🏻‍♀ *राशि फलादेश कन्या* :-
बेचैनी रहेगी। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। राजकीय बाधा दूर होगी। नेत्र पीड़ा की संभावना। धनलाभ एवं बुद्धि लाभ होगा। शत्रु से परेशान होंगे। अपमान होने की संभावना। कष्ट की संभावना। धनहानि। कष्ट-पीड़ा। शारीरिक पीड़ा होगी।

⚖ *राशि फलादेश तुला* :-
स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। भागदौड़ रहेगी। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। धनागम सुस्त रहेगा। कार्य के प्रति अनमनापन रहेगा। दु:खद समाचार प्राप्त हो सकता है। कुछ लाभ की संभावना। चिंताएं कुछ कम होंगी।

🦂 *राशि फलादेश वृश्चिक* :-
लेन-देन में सावधानी रखें। पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। शत्रु पर विजय, हर्ष के समाचार मिलने की संभावना। कुसंग से हानि। धनागम सुखद रहेगा। प्रेमिका मिलेगी। कुछ आय होगी। माता को कष्ट रहेगा।

🏹 *राशि फलादेश धनु* :-
भय, पीड़ा व भ्रम की स्थिति बन सकती है। व्यर्थ भागदौड़ होगी। भय-पीड़ा, मानसिक कष्ट की संभावना। लाभ तथा पराक्रम ठीक रहेगा। दु:समाचार प्राप्त होंगे। हानि तथा भय की संभावना, पराक्रम से सफलता, कलहकारी वातावरण बनेगा। भयकारक दिन रहेगा।

🐊 *राशि फलादेश मकर* :-
जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। घर-बाहर अशांति रह सकती है। प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा के योग बनेंगे। कुछ कष्ट होने की संभावना। लाभ के योग बनेंगे। स्त्री वर्ग को कष्ट। कुसंग से कष्ट। कलहकारक दिन रहेगा। अपनी तरफ से बात को बढ़ावा न दें।

🏺 *राशि फलादेश कुंभ* :-
शुभ समाचार प्राप्त होंगे। पुराने मित्र व संबंधी मिलेंगे। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। आय में वृद्धि होगी। विरोध की संभावना, धनहानि, गृहस्‍थी में कलह, रोग से घिरने की संभावना, कुछ कार्यसिद्धि की संभावना। चिंताएं जन्म लेंगी। स्त्री पीड़ा, कुछ लाभ की आशा करें।

🐋 *राशि फलादेश मीन* :-
रोजगार में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। परिवार की चिंता रहेगी। लाभ होगा। अस्वस्थता का अनुभव करेंगे। चिंता से मुक्ति नहीं मिलेगी। शत्रु दबे रहेंगे। कलह-अपमान से बचें। संभावित यात्रा होगी। सावधानी बरतना होगी।

।। आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।।


Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 31, 2018

कौन है आपके इष्टदेव आइये जानते है ।

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आइये अपनी लग्न कुंडली से जाने अपने ईष्ट देव को….

भारतीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ईश्वरीय शक्ति की उपासना अलग-अलग रूपों में की जाती है। हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवताओं को उपास्य देव माना गया है व विभिन्न शक्तियों के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
आजकल परेशानियों, कठिनाइयों के चलते हम ग्रह शांति के उपायों के रूप में कई देवी-देवताओं की आराधना, मंत्र जाप एक साथ करते जाते हैं। परिणाम यह होता है कि किसी भी देवता को प्रसन्न नहीं कर पाते- जैसा कि कहा गया है – ‘एकै साधै सब सधै, सब साधै सब जाय’ जन्मकुंडली के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के इष्ट देवी या देवता निश्चित होते हैं।
यदि उन्हें जान लिया जाए तो कितने भी प्रतिकूल ग्रह हो, आसानी से उनके दुष्प्रभावों से रक्षा की जा सकती है।हम सब प्रतिदिन विभिन्न देवी -देवताओं का पूजन करते हैं। लगभग सभी सकाम पूजा ही करते हैं। कहने का मतलब यह है कि हम हमारी मनोकामना पूर्ण करने के लिए ही ईश्वर को मानते है। बहुत कम लोग होते हैं निष्काम पूजा करते हैं। बहुत सारे लोगों कि यह शिकायत होती है कि वो पूजा -व्रत आदि बहुत करते हैं फिर भी फल नहीं मिलता। 
मैं यहाँ कहना चाहूंग कि हमें काम तो बिजली विभाग में होता है और चले जाते हैं जल-विभाग में ! जब हम गलत कार्यालय में जायेंगे तो काम कैसे होगा। इसी प्रकार हर कुंडली के अनुसार उसके अपने अनुकूल देवता होते हैं।
लग्नानुसार इष्ट देव——
लग्न स्वामी ग्रह इष्ट देव
मेष, वृश्चिक मंगल हनुमान जी, राम जी
वृषभ, तुला शुक्र दुर्गा जी
मिथुन, कन्याबुध गणेश जी, विष्णु
कर्क चंद्र शिव जी
सिंह सूर्य गायत्री, हनुमान जी
धनु/ मीन गुरु विष्णु जी (सभी रूप), लक्ष्मी जी
मकर, कुंभ शनि हनुमान जी, शिव जी
लग्न के अतिरिक्त पंचम व नवम भाव के स्वामी ग्रहों के अनुसार देवी-देवताओं का ध्यान पूजन भी सुख-सौहार्द्र बढ़ाने वाला होता है। इष्ट देव की पूजा करने के साथ रोज एक या दो माला मंत्र जाप करना चमत्कारिक फल दे सकता है और आपकी संकटों से रक्षा कर सकता है।
विशेष : इष्ट का ध्यान-जप का समय निश्चित होना चाहिए अर्थात यदि आप सुबह सात बजे जप ध्यान करते हैं, तो रोज उसी समय ध्यान करें। अपनी सुविधानुसार समय न बदलें।
व्यक्ति यदि अपने लग्र के देवता की पूजा करें तो उनको अपने हर काम में सफलता मिलने लगेगी।
देव मंत्र —-
हनुमान—- ऊँ हं हनुमंताय नम:
शिव—- ऊँ रुद्राय नम:
गणेश —ऊँ गंगणपतयै नम:
दुर्गा— ऊँ दुं दुर्गाय नम:
राम —-ऊँ रां रामाय नम:
विष्णु— विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
लक्ष्मी— लक्ष्मी चालीसा,…ऊँ श्रीं श्रीयै नम:
किसी भी कुंडली के लग्न /प्रथम भाव , पंचम भाव और नवम भाव में स्थित राशि के अनुसार इष्ट देव निर्धारित होते है और इनके अनुसार ही रत्न धारण किये जा सकते हैं।
मेष लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर प्रथम राशि मेष होती है तो वह मेष लग्न की कुंडली कही जायेगी। मेष लग्न में पांचवे भाव में सिंह राशि और नवम भाव में धनु राशि होती है।
मेष राशि का स्वामी मंगल , सिंह राशि का स्वामी है सूर्य और धनु राशि का स्वामी वृहस्पति है। इस कुंडली के लिए अनुकूल देव हनुमान जी , सूर्य देव और विष्णु भगवान है ।
मेष लग्न के लिए हनुमान जी की आराधना , मंगल के व्रत , सूर्य चालीसा , आदित्य – हृदय स्त्रोत , राम रक्षा स्त्रोत , रविवार का व्रत , वृहस्पति वार का व्रत , विष्णु पूजन करना चाहिए। मूंगा , माणिक्य और पुखराज रत्न अनुकूल रहेंगे।
वृषभ लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर द्वितीय राशि वृषभ होती है तो वह वृषभ लग्न की कुंडली कही जायेगी। वृषभ लग्न में पांचवे भाव में कन्या राशि और नवम भाव में मकर राशि होती है।
वृषभ राशि का स्वामी शुक्र , कन्या राशि का बुध और मकर राशि के स्वामी शनि देव है।
वृषभ लग्न वालों के लिए लक्ष्मी देवी , गणेश जी और दुर्गा देवी की आराधना उचित रहेगी। लक्ष्मी चालीसा , दुर्गा चालीसा और गणेश चालीसा का पाठ करना चाहिए।
मिथुन लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर तृतीय राशि मिथुन होती है तो वह मिथुन लग्न की कुंडली कही जायेगी। मिथुन लग्न में पांचवे भाव में तुला राशि और नवम भाव में कुम्भ राशि होती है।
मिथुन राशि का स्वामी बुध , तुला राशि का शुक्र और कुंभ राशि का स्वामी शनि देव हैं।
इस लग्न के लिए गणेश जी , लक्ष्मी देवी और काली माता अराध्य होगी। कुम्भ राशि के स्वामी शनि होने के कारण शनि देव को प्रसन्न और शांत रखने के उपाय किये जा सकते हैं।
इस लग्न के लिए पन्ना , हीरा और नीलम अनुकूल रत्न हैं।
कर्क लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर चतुर्थ राशि कर्क होती है तो वह कर्क लग्न की कुंडली कही जायेगी। कर्क लग्न के पांचवे भाव में वृश्चिक राशि और नवम भाव में मीन राशि होती है।
कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा,वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल और मीन राशि के स्वामी वृहस्पति होते है। इस लग्न के लिए शिव जी , हनुमान जी और विष्णु जी अराध्य देव होंगे।
इस लग्न के लिए मोती , मूंगा और पुखराज अनुकूल रत्न हैं।
सिंह लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर पंचम राशि सिंह होती है तो वह सिंह लग्न की कुंडली कही जायेगी। सिंह लग्न के पांचवे भाव में धनु राशि और नवम भाव में मेष राशि होती है।
सिंह राशि का स्वामी सूर्य देव , धनु राशि के स्वामी वृहस्पति और मेष राशि के स्वामी मंगल होता है।
इस लग्न के लिए सूर्य देव , विष्णु जी और हनुमान जी आराध्य देव होंगे।
इस लग्न के लिए माणिक्य , मूंगा और पुखराज रत्न अनुकूल होते हैं।
कन्या लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर षष्ठ राशि कन्या होती है तो वह कन्या लग्न की कुंडली कही जायेगी। इस लग्न के पांचवे भाव में मकर राशि और नवम भान में वृषभ राशि होती है।
कन्या राशि का स्वामी बुध , मकर राशि का स्वामी शनि और वृषभ राशि का स्वामी शुक्र होता है।
इस लग्न के लिए गणेश जी , दुर्गा देवी ,लक्ष्मी देवी आराध्य देव होते हैं और पन्ना, नीलम और हीरा अनुकूल रत्न होते हैं।
तुला लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर सप्तम राशि तुला हो तो वह तुला लग्न की कुंडली कही जायेगी। तुला लग्न में पांचवे भाव में कुम्भ राशि और नवम भाव में मिथुन राशि होती है। तुला राशि का स्वामी शुक्र , कुम्भ राशि का स्वामी शनि और मिथुन राशि का स्वामी बुध होता है। इस लग्न के लिए लक्ष्मी देवी , काली देवी , दुर्गा देवी और गणेश जी आराध्य देव हैं और हीरा , नीलम और पन्ना अनुकूल रत्न है।
वृश्चिक लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर अष्ठम राशि वृश्चिक हो तो वह वृश्चिक लग्न की कुंडली कही जायेगी। वृश्चिक लग्न में पांचवे भाव में मीन राशि और नवम भाव में कर्क राशि होती है। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल , मीन राशि का स्वामी वृहस्पति और कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा होता है। इस लग्न के लिए हनुमान जी , विष्णु जी और शिव जी अराध्य देव होते है और मूंगा , पुखराज और मोती अनुकूल रत्न है।
धनु लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर नवम राशि धनु हो तो वह धनुलग्न की कुंडली कही जायेगी। धनु लग्न में पांचवे भाव में मेष राशि और नवम भाव में सिंह राशि होती है। धनु राशि का स्वामी वृहस्पति , मेष राशि का स्वामी मंगल और सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। इस लग्न के लिए विष्णु जी ,हनुमान जी और सूर्य देव आराध्य देव हैं और पुखराज , मूंगा और माणिक्य अनुकूल रत्न है।
मकर लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर दशम राशि मकर हो तो वह मकर लग्न की कुंडली कही जायेगी। मकर लग्न में पांचवे भाव में वृषभ राशि और नवम भाव में कन्या राशि होती है। मकर राशि का स्वामी शनि , वृषभ राशि का स्वामी शुक्र और कन्या राशि का स्वामी बुध होता है। इस लग्न के लिए शनि देव , हनुमान जी , दुर्गा देवी , लक्ष्मी देवी और गणेश जी आराध्य देव है और नीलम , हीरा और पन्ना अनुकूल रत्न है।
कुम्भ लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर एकादश राशि कुम्भ हो तो वह कुम्भ लग्न की कुंडली कही जायेगी। कुम्भ लग्न में पांचवे भाव में मिथुन राशि और नवम भाव में तुला राशि होती है।कुम्भ राशि का स्वामी शनि , मिथुन राशि का स्वामी बुध और तुला राशि का स्वामी शुक्र होता है। इस लगन के लिए शनि देव , काली देवी , गणेश जी , दुर्गा देवी और लक्ष्मी देवी आराध्य देव है और नीलम , पन्ना और हीरा अनुकूल रत्न है।
मीन लग्न :– जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर द्वादश राशि मीन हो तो वह मीन लग्न की कुंडली कही जायेगी। मीन लग्न में पांचवे भाव में कर्क राशि और नवम भाव में वृश्चिक राशि होती है। मीन राशि का स्वामी वृहस्पति , कर्क राशि का स्वामी चन्द्र और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है। इस लग्न के लिए विष्णु जी , शिव जी और हनुमान जी आराध्य देव है और पुखराज , मोती और मूंगा अनुकूल रत्न है।
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शास्त्रों की मान्यतानुसार अपने इष्ट देव की आराधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। आपके आराघ्य इष्ट देव कौन से होंगे इसे आप अपनी जन्म तारीख, जन्मदिन, बोलते नाम की राशि या अपनी जन्म कुंडली की लग्न राशि के अनुसार जान सकते हैं।
जन्म माह :—
जिन्हें केवल जन्म का माह ज्ञात है, उनके लिए इष्ट देव इस प्रकार होंगे-
-जिनका जन्म जनवरी या नवंबर माह में हुआ हो वे शिव या गणेश की पूजा करें।
-फरवरी में जन्मे शिव की उपासना करें।
-मार्च , अगस्त व दिसंबर में जन्मे व्यक्ति विष्णु की साधना करें।
-अप्रेल, सितंबर, अक्टूबर में जन्मे व्यक्ति गणेशजी की पूजा करें।
-मई व जून माह में जन्मे व्यक्ति मां भगवती की पूजा करें।
-जुलाई माह में जन्मे व्यक्ति विष्णु व गणेश का घ्यान करें।
जन्म वार से :—-
जिनको वार का पता हो, परंतु समय का पता न हो, तो वार के अनुसार इष्ट देव इस प्रकार होंगे-
रविवार- विष्णु।
सोमवार- शिवजी।
मंगलवार- हनुमानजी
बुधवार- गणेशजी।
गुरूवार- शिवजी
शुक्रवार- देवी।
शनिवार- भैरवजी।
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जन्म कुंडली से :—-
जिनको जन्म समय ज्ञात हो उनके लिए जन्म कुंडली के पंचम स्थान से पूर्व जन्म के संचित कर्म, ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, धर्म व इष्ट का बोध होता है। अरूण संहिता के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर ग्रह या देवता भाव विशेष में स्थित होकर अपना शुभाशुभ फल देते हैं।
राशि के आधार पर :—–
पंचम स्थान में स्थित राशि के आधार पर आपके इष्ट देव इस प्रकार होंगे—–
मेष: सूर्य या विष्णुजी की आराधना करें।
वृष: गणेशजी।
मिथुन: सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कर्क: हनुमानजी।
सिंह: शिवजी।
कन्या: भैरव, हनुमानजी, काली।
तुला: भैरव, हनुमानजी, काली।
वृश्चिक: शिवजी।
धनु: हनुमानजी।
मकर: सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कुंभ: गणेशजी।
मीन: दुर्गा, राधा, सीता या कोई देवी।
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ग्रह के आधार पर इष्ट: पंचम स्थान में स्थित ग्रहों या ग्रह की दृष्टि के आधार पर जानिए आपके इष्ट देव—
सूर्य: विष्णु।
चंद्रमा- राधा, पार्वती, शिव, दुर्गा।
मंगल- हनुमानजी, कार्तिकेय।
बुध- गणेश, विष्णु।
गुरू- शिव।
शुक्र- लक्ष्मी, तारा, सरस्वती।
शनि- भैरव, काली।
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इष्ट देव की उपासना—–
नीचे सभी राशियों के देवता दिए जा रहे हैं। अपनी राशि के अनुसार देवता की आराधना करे—–
मेष : हनुमान जी
वृषभ : दुर्गा माँ
मिथुन : गणपति जी
कर्क: शिव जी
सिंह : विष्णु जी (श्रीराम )
कन्या : गणेश जी
तुला : देवी माँ
वृश्चिक : हनुमान जी
धनु : विष्णु जी
मकर : शिव जी
कुम्भ : शिव का रूद्र रूप
मीन : विष्णु जी (सत्यनारायण भगवान)
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प्रतिनिधि ग्रह– इष्‍ट देव—- रत्न दान —–सामग्री
गुरु————— विष्‍णु—–पुखराज- —पीली वस्तुएँ
शुक्र————- देवी के रूप— हीरा —–सफेद मिठाई
शनि————- शिव जी—– नीलम —-काली वस्तुएँ
सूर्य——— गायत्री, विष्णु—- माणिक— सफेद वस्तुएँ, नारंगी
बुध————- गणेश——– पन्ना——– हरी वस्तु
मंगल ———हनुमानजी ——मूँगा——- लाल वस्तुएँ
चंद्र————- शिवजी——– मोती——- सफेद वस्तु
विशेष : राहु और केतु पर्वतों के खराब होने पर क्रमश:—
सरस्वती और गणेश जी की आराधना करना लाभ देता है।
‘ऊँ रां राहवे नम:’ और ‘ऊँ कें केतवे नम:’ के जाप से भी ये ग्रह शां‍त होते हैं।

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 31, 2018

सोमवार, 30 जुलाई 2018

।। आज का राशिफल 31जुलाई 2018 ।।

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।। आज का राशिफल 31जुलाई 2018 ।।
पंडित आशीष त्रिपाठी

मेष (Aries)
यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। रुका हुआ धन प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा।

वृष (Taurus)
नए अनुबंध हो सकते हैं। कार्यपद्धति सुधरेगी। लाभ में वृद्धि होगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं।

मिथुन (Gemini)
धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। राजकीय सहयोग मिलेगा। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें।

कर्क (Cancer)
चोट व दुर्घटना से हानि संभव है। जल्दबाजी न करें। पुराना रोग उभर सकता है। काम में बाधा होगी।

सिंह (Leo)
राजकीय सहयोग मिलेगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे।

कन्या (Virgo)
उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। संपत्ति के कार्य बड़ा लाभ दे सकते हैं। जल्दबाजी न करें। प्रसन्नता रहेगी।

तुला (Libra)
रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा।

वृश्चिक (Scorpio)
बुरी खबर मिल सकती है। झंझटों में न पड़ें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें, बाकी सामान्य रहेगा।

धनु (Sagittarius)
मेहनत का फल पूरा-पूरा मिलेगा। कार्य की प्रशंसा होगी। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी।

मकर (Capricorn)
पुराने भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। लाभ के अवसर प्राप्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। विवाद न करें।

कुंभ (Aquarius)
यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल लाभ देंगे। रोजगार मिलेगा। नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति होगी।

मीन (Pisces)
लाभ के अवसर हाथ से निकलेंगे। तनाव रहेगा। फालतू खर्च होगा। कुसंगति से हानि होगी।

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 30, 2018

रविवार, 29 जुलाई 2018

श्रावण मास में विशेष: अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में

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जाने अर्धनारेश्वर शिव चित्र के बारे में
अर्धनारेश्वर शिव चित्र मतलब आधे शिव और आधी पार्वती जी का चित्र जो हम सभी ने देखा और सुना / सभी पूजते है इस चित्र को सनातन  धर्मं  में / लेकिन क्या कभी जानने कि कोशिश कि कि क्या ये चित्र भी हमे कुछ बताता है ?
 सनातन  धर्मं  में एक भी चित्र से लेकर वेद  पुराण  तक सभी में ज्ञान है हमारे  जीवन को चलाने के लिए बस बात है समझने कि और समझाने कि कि कैसे पता चले उस ज्ञान के बारे में जो हमें हमारे शरीर के को स्वस्थ रखे /
अब जानते है अर्धनारेश्वर चित्र के दहिने और माँ पार्वती के चित्र से
माँ पार्वती स्त्री का प्रतिनिधित्व कर रही है स्त्री जो पूजनीय है जो प्रथम है जो जननी है
माँ पार्वती का आधा भाग यह दर्शाता है कि जीवन में पहले एक स्त्री के गुणों को जीवन में अमल में लाना चाहिये / और उसके बाद पुरुष  के चरित्र और गुणों को ...
स्त्री के मस्तिष्क :- स्त्री के गुणों का अनुसरण करने से तत्य्पर्य यह है कि एक स्त्री जो जननी है जो पली और बड़ी हुई किसी और घर में और अपने जीवन का आधे से ज्यादा समय किसी और के यहाँ बिता देती है /
और अपने  मस्तिष्क के अनुरूप काम लेकर उस घर में अपने को ढाल लेती है जैसा वहा का वातावरण होता है /
अगर हम भी यानि सभी अपने जीवन में कभी  अनजानी और अपरचित जगह जाते है तो एक स्त्री के मष्तिष्क कि तरह काम लेकर वहा के अनुरूप ढल जाय / ताकि हम उस वातावरण में रहकर कार्य कर सके /
स्त्री के नेत्र कि तरह :- एक स्त्री के नेत्र विषम परिस्थितयों में ही क्रोध से भरे दिखाई देते है नहीं तो एक स्त्री हमेशा प्रेम स्नेह और ममता पूर्ण नेत्रों से देखती है दयालुता सम्मान उसके नेत्रों में दिखाई पड़ती है  / तो हमे भी अपने जीवन में स्त्री नेत्रों कि तरह ही प्यार और सम्मान से लोगो को देखना चाहिए /
स्त्री के कान :- एक स्त्री ससुराल में अपने कानो से सब कुछ सुनकर वहा पर सामंजस्य बनाकर रखती है /
स्त्री के कान सब कुछ सुन कर भी सहन करने कि क्षमता रखते है विशेष परिस्थितियों में ही उसे बोलने कि जरुरत पड़ती है / तो हमे भी सर्व प्रथम अपने  कानो को स्त्री के कानो कि तरह ही इस्तेमाल  करना चाहिए /
स्त्री मुख :- स्त्री मुख से निकालने वाले बोल भी कोमल और स्नेह से भरे होते है ,कभी भी असहज लगने वाले सब्दो का प्रयोग नहीं करती है स्त्रिया / इसलिए  हमे भी अपने मुख से क्रोधी और असहज  लगने वालो शब्दों का प्रयोग न करना स्त्री मुख से सीखना चाहिए या उनका अनुसरण करना चाहिए /
अगर हम क्रोधित होते  है को कई लोग क्रोधित होते है और क्रोध नाश का कारण होता है और मुख ही शुभ और अशुभ संकेत दे जाता है /
स्त्री ह्रदय :- स्त्री का ह्रदय कोमल दया से भरा प्यार और स्नेह  लिए हुए होता है ईर्षा और बदले कि भावना उसके दिल में नहीं होती है वो तो परोपकारी  ह्रदय कि स्वामी होती है जिसको देना आता है /
माँ बहन पत्नी और बेटी इसका उदाहरण है हमे भी जीवन में पहले स्त्री ह्रदय से काम लेना चाहिए /
स्त्री के हाथ और पैर  :- स्त्री के हाथ और पैर  हमेशा दूसरो कि मदद और सेवा के लिए उठते है जिनमे स्वार्थ और बदले कि भावना तनिक भी नहीं होती है हमे भी अपने हाथ और पैर  में स्त्री के हाथ और पैर  के गुण रखने चाहिए /
इन स्त्री गुणों को हमे अपने जीवन मे पहले अपनाना चाहिए जिसके बाद शिव यानि पुरुष गुणों को जीवन में लाना चाहिए /
चित्र के बाई और शिव स्वरुप ईश्वर  यानि पुरुष कर प्रतिनिधित्व कर रहे है / जो जीवन में स्त्री आचरण के बाद पुरुष आचरण को लाने का सन्देश देते है /
पुरुष का मष्तिष्क :- पुरुष मस्तिश तीव्र गति से सोचने वाला तीव्र निर्णय लेने वाला और समय और परिस्थित के अनुसार व्यवहार करने वाला होता है अतः अतः हमे पुरुष मष्तिष्क का अनुसरण स्त्री मस्तिष्क के उपरांत करना चाहिए /
पुरुष नेत्र :-पुरुष नेत्रों में कठोरता क्रोध ज्यादा और  भावुकता कम ही होती है / अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष नेत्रों का इस्तेमाल करना चाहिए /
पुरुष कान :- पुरुषो के कान  ज्यादा गंभीर और ज्यदा देर तक सहन नहीं कर सकते है / अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष कानो का इस्तेमाल करना चाहिए /
पुरुष मुख :-स्त्री मुख कि अपेक्षा पुरुष मुख से कोमल व स्नेही शब्द कम ही निकलते है अतः हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष मुख का स्तेमाल करना चाहिए /
पुरुष ह्रदय :- पुरुष  ह्रदय कठोर होता है उसमे स्त्री ह्रदय कि तरह भावना  कम होती है / यहाँ पर भी हमे समय और परिस्थित के अनुसार पुरुष ह्रदय को अपना लेना चाहिए /
पुरुष के हाथ और पैर :- पुरुष के हाथ बलशाली और पैर तीव्र गति लिए होते है जो जरूरत पडने पर हमेशा  मजबूती प्रदान करते है अतः स्त्री के हाथ और पैरो के गुणों के बाद आवश्यकता पडने पर पुरुष के  हाथ और पैरो कि तरह ही आचरण करना चाहिए /
भगवन शिव  जिनका प्रतिनिधित्व कर रहे है  जो पालनकर्ता है जो विघ्नहर्ता है जो कर्ता  है / उनका अनुसरण करना चाहिए /
जय शिव शम्भू 


Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 29, 2018

।। आज का राशिफल 30 जुलाई 2018 ।।

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।। आज का राशिफल 30 जुलाई 2018 ।।
पंडित आशीष त्रिपाठी


मेष (Aries)
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय में वृद्धि होगी। प्रसन्नता रहेगी।

वृष (Taurus)
नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। शत्रु सक्रिय रहेंगे। सावधानी रखें। आय में वृद्धि होगी।

मिथुन (Gemini)
कुसंगति से कष्ट होगा। अध्यात्म में रुचि रहेगी। कानूनी बाधा दूर होगी। लभा के अवसर प्राप्त होंगे।

कर्क (Cancer)
चोट, चोरी व विवाद आदि से हानि संभव है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा।

सिंह (Leo)
घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। कानूनी अड़चन दूर होगी। आय बढ़ेगी।

कन्या (Virgo)
भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। रोजगार प्राप्त होगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। जोखिम न उठाएं।

तुला (Libra)
पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। बेचैनी रहेगी। जोखिम न लें।

वृश्चिक (Scorpio)
वस्तुएं संभालकर रखें। विवाद को बढ़ावा न दें। दु:खद समाचार मिल सकता है। जोखिम न लें।

धनु (Sagittarius)
अज्ञात भय सताएगा। प्रयास सफल रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें।

मकर (Capricorn)
अतिथियों का आगमन होगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। आत्मसम्मान बना रहेगा।

कुंभ (Aquarius)
बेरोजगारी दूर होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। अचानक लाभ होगा।

मीन (Pisces)
अप्रत्याशित खर्च होंगे। कर्ज लेना पड़ सकता है। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। जोखिम न लें।

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 29, 2018

शनिवार, 28 जुलाई 2018

आज का राशिफल 29 जुलाई 2018

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आज का राशिफल 29 जुलाई 2018

मेष (Aries)
योजना फलीभूत होगी। यात्रा मनोरंजक रहेगी। नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

वृष (Taurus)
तीर्थदर्शन संभव है। व्यवसाय ठीक चलेगा। सत्संग का लाभ मिलेगा। पुराने साथी मिलेंगे। लाभ होगा।

मिथुन (Gemini)
स्वास्थ्य का ध्यान रखें। दुष्‍टजन हानि पहुंचा सकते हैं। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। धैर्य रखें।

कर्क (Cancer)
यात्रा मनोरंजक रहेगी। धनलाभ होगा। वरिष्ठजन सहयोग करेंगे। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। लाभ होगा।

सिंह (Leo)
घर में प्रसन्नता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं।

कन्या (Virgo)
पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। मनोरंजक कार्यक्रम में हिस्सा मिलेगा।

तुला (Libra)
प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। बुरी खबर मिल सकती है। कष्ट संभव है।

वृश्चिक (Scorpio)
घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। कार्यसिद्धि होगी। जल्दबाजी न करें। लाभ के अवसर बढ़ेंगे। प्रमाद न करें।

धनु (Sagittarius)
घर में मेहमानों का आगमन होगा। अच्छे समाचार मिलेंगे। प्रसन्नता रहेगी। स्वाभिमान बढ़ेगा।

मकर (Capricorn)
यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल रहेंगे। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। भाग्योन्नति होगी। प्रमाद न करें।

कुंभ (Aquarius)
व्ययवृद्धि से तनाव रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विवाद न करें। झंझटों से दूर रहें।

मीन (Pisces)
मनोरंजक यात्रा होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। कार्यविस्तार की योजना बनेगी।

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 28, 2018

शुक्रवार, 27 जुलाई 2018

। आज का राशिफल 28 जुलाई 2018 ।।

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।। आज का राशिफल 28 जुलाई 2018 ।।


मेष (Aries)
कार्यस्थल पर परिवर्तन संभव है। नए अनुबंध होंगे। यात्रा सफल रहेगी। नौकरी में अधिकार बढ़ेंगे।

वृष (Taurus)
यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल लाभ देंगे। धर्म-कर्म में आस्था बढ़ेगी। कानूनी बाधा दूर होगी। लाभ होगा।

मिथुन (Gemini)
जल्दबाजी से हानि होगी। पुराना रोग उभर सकता है। कुसंगति से बचें। लेन-देन में सावधानी रखें।

कर्क (Cancer)
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। कानूनी अड़चन दूर होगी। व्यवसाय ठीक चलेगा।

सिंह (Leo)
जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। संपत्ति के कार्य बनेंगे। निवेश शुभ रहेगा। यात्रा होगी। जोखिम न लें।

कन्या (Virgo)
स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। यात्रा होगी। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

तुला (Libra)
मेहनत अधिक व लाभ कम होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। शोक समाचार मिल सकता है। जोखिम न लें।

वृश्चिक (Scorpio)
मेहनत का फल मिलेगा। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। जोखिम न उठाएं। प्रसन्नता रहेगी।

धनु (Sagittarius)
उत्साहवर्धक सूचना मिलेगी। स्वाभिमान बना रहेगा। विवाद न करें। व्यवसाय लाभदायक रहेगा।

मकर (Capricorn)
बेरोजगारी दूर होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। प्रसन्नता रहेगी।

कुंभ (Aquarius)
वाणी पर नियंत्रण रखें। जल्दबाजी न करें। फालतू खर्च होगा। झंझटों से दूर रहें। धनहानि संभव है।

मीन (Pisces)
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। विरोधी सक्रिय रहेंगे। यात्रा, निवेश व नौकरी मनोनुकूल रहेंगे।

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 27, 2018

शरीर आत्मा और कर्म

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हम सभी ने सुना है हमारे इस जन्म के कर्मो का फल हमे अपने अगले जन्म में भोगना पड़ता है /
लेकिन क्या ये  नियम सही है या यह बात सही है जब हम आत्मा के साथ शरीर के द्वारा कर्म कर रहे थे तब चाहे वो कर्र्म अच्छे हो या बुरे उस शरीर के मष्तिष्क में याद में तो वो बात अंकित थी लेकिन आत्मा के शरीर छोड़ जाने के बाद हमारे कर्म हमारी यांदे सभी उस शरीर ( मृत शरीर ) के साथ नष्ट होते ही नष्ट हो जाती है
हम इन बातो को दो कहानियो के द्वारा समझ सकते है /
पहली कहानी में:-
एक अपराधी किस्म का व्यक्ति जिस शहर और क्षेत्र में रहता था वहा पर और वहा के लोगो के लिए वो एक अपराधी था और उस व्यक्ति से सभी भयभीत थे परेशां थे लेकिन काफी समय गुजरने के बाद उस व्यक्ति को अपने अपराध का ज्ञान हुआ की मैं जो भी कुछ कर रहा हु वो गलत है उसका ह्रदय परिवर्तन हो गया Aऔर वो अपराध की दुनिया को छोड़ कर एक अच्छा इन्सान बन जाता है लेकिन उसके आतंक से डरे हुए लोग अभी भी उसके इस रूप को कुछ और ही समझ रहे थे और वो उसके पास जाने और उससे बात करने में डरते थे / उसको इस बात से कष्ट हुआ की यहाँ के लोग तो मुझे अच्छा समझ ही नहीं रहे है तो ऊसने उस शहर को छोड़ दिया और दुसरे शहर में जाकर अपनी नई आदतों के साथ लोगो के बीच में रहने लगा और उस शहर के लोग उससे अत्यंत प्रेम करने लगे कोई भी दुःख मुसीबत होने पर वो उस व्यक्ति से ही मदद मांगने जाते उसको भी लोगो की सेवा करने में मज़ा आने लगा और वो  अपने पुराने दिन भूल गया और अपनी नई  दुनिया में खुश होकर जी रहा था / लेकिन तभी एक छोटे से हादसे में उसके दोनों पैर कट जाते है उस शहर के लोग इतनी अच्छे और व्यवहारिक  व्यक्ति के साथ हुए ऐसे हादसे को सुनकर काप जाते है और ईश्वर से कहते है की आपने ये क्या किया इतने मिलनसार व्यक्ति और सबकी मदद करने वाले व्यक्ति के पैरो को ही छीन लिया क्यों /
अभी कुछ साल ही बीते थे की उस व्यक्ति के घर में एक और हादसा होता है और उसकी पत्नी और बच्चे उस हादसे में जल कर मर जाते है अब तो उस व्यक्ति को जानने वाले सभी लोग ईश्वर के इस कर्म को बड़ी ही निर्दयता बताने लगे की ईश्वर आप इस इन्सान से चाहते क्या हो इसने एसा क्या किया जो आप इतनी सजा दे रहे हो  दूसरी और वो व्यक्ति रोता हुआ अपने पुराने कर्मो को सोच सोच कर रो रहा था जब वो लोगो को तकलीफ दे कर हसंता था किसी भी दिन बैगैर किसी को परेशां किये और मार कर उसे नींद न आया करती थी बच्चे हो या बडे सभी के लिए उसके मन में दया नाम की चीज़ न थी सब रोते थे और वो हसता था / लेकिन आज वो रो रहा है और वो ईश्वर शायद हस रहा होगा क्योंकि एक वही है जो उसके पुराने कर्मो को अच्छे से जानता है बाकि तो सभी सिक्के के अच्छे पहलू को ही देख रहे थे  अगर वो सब भी यहाँ मौजूद होते जिनको मैने तकलीफ दी थी शायद वो भी आज सुकून पा रहे होते मुझे तकलीफ में देख कर / अब उस अपराधी को समझ आ गया था की मेरे कर्म ही थे जो मुझे आज इस रास्ते पर ले आए है जब मै ये  समझ पर रहा हु की अपनों से बिछुड़ना क्या होता है किसी के हाथ या पैर टूटने में क्या तकलीफ होती होगी / ये मेरे ही कर्म है और मैं ही इनका भोग करूँगा 
इस कहानी को बताने का तात्पर्य ये था की इस कहानी से ये समझ में आता  है की हमे हमारे कर्मो का फल इस जन्म में ही भोगना पड़ता है /
न हम कुछ लेकर आए थे न कुछ लेकर जायेंगे न यांदे न कर्म न कुछ भी जो यहाँ से लिया वो यहाँ पर ही छोड़ कर चल दिए /
अब दूसरी कहानी को समझते है :-
एक लड़का था जिसका नाम रुदन था रूदन जब तीन साल का था तब ही उसके माता  पिता की मृत्यु  हो गई थी और उसका पालन पोषण उसके नाना और नानी ने शूरू किया नाना और नानी काफी बुडे थे इसलिए पांच  साल की उम्र में रुदन के  पहुचते ही उनकी भी मृत्यु हो जाती है / अब रुदन के पालन और पोषण का पूरा जिम्मा रुदन के मामा और मामी पर आ जाता है रुदन के मामा तो उसे अपना बेटा  ही मानते थे लेकिन रुदन की मामी उसे एक नौकर से ज्यादा कुछ न समझती थी बात बात पर उसे ताने  देना  की बचपन में अपने मम्मी पापा को खा गया और बडे होते ही अपने नाना और नानी को क्या अब हमे जीने देगा की  नहीं उस मासूम बच्चे को इन बातो का अर्थ भी न पता था और मामी का उसको मरना उनके लिए आम बात थी / समय गुजरता गया और मामी की वजह से रुदन की शिक्षा भी ज्यादा न हो सकी इसलिए उसको एक होटल में काम करने के लिए उसकी मामी भेजने लगी की बैठे बैठे घर में खाया करता है जा के चार पैसे  का कम तो कर  रुदन की किस्मत यहाँ भी ख़राब थी होटल मालिक काम ज्यादा करवाता और खाना भी कम देता और जरा सी बात पर ही उसको मार देता घर आता तो मामी अपने घर के काम उससे करवाया करती /
उम्र के साथ रुदन बड़ा हुआ तो मामा और मामी ने उसकी शादी तय कर दी रुदन को लगा की अब शायद सब ठीक हो जायेगा लेकिन शादी के अभी तीन  दिन ही बीते थे की मामी ने रुदन को उसकी पत्नी के साथ बहार का रास्ता दिखा दिया साथ में जो ऊसको दहेज़ में सामान मिला था और उसने बचपन से जो भी कुछ इकठ्ठा किया था सब कुछ लेकर उसे घर छोड़ने को कह दिया और मांगने पर कहा जब तू तीन साल का था तब क्या लेकर आया था ये सब हमारा ही तो है/
रुदन ने नई जगह पर जा कर फिर से एक नई  जिंदगी की शुरुआत करने लगा जैसे तैसे उसकी जिंदगी चल रही थी की उसकी पत्नी ने भी अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए की तुम्हारे साथ शादी करके मेरे तो कर्म ही फूट गए शादी के तीन दिन बाद ही तुमरे मामा और मामी ने घर से निकाल दिया जितना कमा कर लाते हो उससे घर तो चलता नहीं मैं कौन से शौक कर पाऊँगी और रोज़ काम से थक हार कर जब घर आता तो उसे ये तने ही सूनने को मिलते /
 एक दिन जब रुदन घर आता है तो उसे उसके ही घर में घुसने से उसकी पत्नी मना कर देती है की अब तुम्हारा और हमारा कोई संबंध नहीं रहा मैने किसी और के साथ शादी कर ली है /
आज रुदन फिर उस जगह आकर खड़ा हो गया था जहा से वो चला था तीन साल की उम्र में जब उसके माँ बाप उसे छोड़ कर उसे इस दुनिया से चले गए थे और आज भी उसे सब छोड़ कर चले गय है /
वो भगवान के मदिर में बैठा ये ही सोचता जा रहा था की हे भगवान  मुझे आपने  किन कर्मो की सजा मिल रही है मैने अपनी पूरी जिंदगी में किसी को तकलीफ भी नहीं दी किसी का दिल तक नहीं दुखया फिर क्यों इतनी तकलीफे मेरे हिस्से में आ रही है /
ईश्वर एक तू ही तो है जो मेरे पूरी जिंदगी को देख रहा है बता मैने कौन सा बुरा कर्म किया जो मुझे ये सजा मिल रही है और रुदन रोता रहता है A
अब पहली कहानी से तो ये पता चला की हमारे द्वारा किये गए कर्म हमे इस जन्म में ही भोगने पड़ते है एक व्यक्ति तकलीफे देता है तो उसे भी तकलीफे मिलती है / इसलिए वो अपने कर्मो का भोग कर रहा है /
 और दूसरी कहानी में वो व्यक्ति कौन से कर्मो का भोग कर रहा है उसे पता ही नहीं अ लेकिन क्या ये  पूर्व जन्म के कर्म हमे दूसरे जीवन में भोगने पड़ते है ! लेकिन जब ये कहा जा रहा है की जब हम कुछ लेकर आते नहीं और कुछ लेकर जाते नहीं तो फिर ये कैसे संभव है की हमे पूर्व जन्म के कर्मो का भोग अगले जन्म में करना पड़ता है / जब की हमे उन कर्मो की याद भी नहीं रह जाती /
कुल मिलाकर ये ठीक वैसा ही है की हमे अपराधी बना कर दंड दिया जा रहा है जो कर्म हमने किया ही नहीं और कहा ये जा रहा है की ये जो आप ने अपराध किया था वो आपके पूर्व जन्म का है जब आप ने तीन  व्यक्तीयों की हत्या की थी आज से तीस साल पहले और आपके आते ही ये केस फिर से खुल गया है और उसका दंड भी आपको मिलेगा लेकिन वो व्यक्ति ये जनता ही नहीं की ये सब जो कह रहे है कहा तक सही है /
जबकि मृत्यु के पश्चात् ही हमरे जीवन से सम्बंधित सभी दस्तावेज़ बेकार हो जाते है फिर ये कैसे संभव है /
ये एक प्रश्न है जिसका उत्तर देकर मेरी इस खोज में सहयोग करे /

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 27, 2018

हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्यों मे केला के पूजन के पीछे क्या है कारण

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हमारे देश में पेड़ पौधे को पुज्नीय माना जात है। तो कभी किसी रुप में तो कभी औषधि के रूप में। हिंदू धर्म में कई पेड़-पौधे ऐसे है। जिनके पीछे कोई न कोई पौराणिक कथा है। इन्ही में से एक है। केला का पौधा। केले के फलतना और पत्तों को हमारे पूजा विधान में अनेक तरह से उपयोग किया जाता है। यह शुभ और पवित्रता का प्रतीक है। केले के वृक्ष में देवगुरु बृहस्पति का वास होता है। शास्त्रों के अनुसार सात गुरुवार नियमित रूप से केले की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। हिंदू धर्म में केले के पौधे को बहुत पवित्र माना गया है साथ ही इसे कई धार्मिक कार्य उपयोग किया जाता है। लेकिन आप इस बात को नही जानते होगे कि आखिर इसकी हर मांगलिक कामों में पूजा क्यों की जाती है। तो हम आपको बताते है कि इसकी पूजा क्यों की जाती है। पुराणों के अनुसार माना जात है कि केले के वृक्ष में साक्षात विष्णु निवास करते है। गुरुवार के दिन इसीलिेए केला के वृक्ष की पूजा की जाती है। माना जाता है कि अगर केले की वृक्ष की पूजा विधि-विधान और श्रृद्धा के साथ की जाए तो भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों सुख समृद्धि और शांति का वर प्राप्त होता है। केले के वृक्ष को शुभ और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है।

केले की पवित्रता का अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पुराने समय में इसके तने से निकाले गए पानी से ही उपवास के लिए पापड़ आदि बनाए जाते थे।  शास्त्रों के अनुसार माना जाता है कि केले की पूजा करने से गुरु दोष भी समाप्त होता है। अत: घर केले की पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। कुछ जगह पर घर में यानी कि घर के अन्दर केले का पौधा नहीं रखना चाहिए। माना जाता है कि गृह स्वामी के उत्थान में बाधक होता है। इसे आंगन में लगाने का विधान है। इसकी पूजा विधि-विधान से करन चाहिए। अगर आप केले की पूजा करना चाहते है तो इस तरह करें जिससे कि आपको इसका पूर्ण फल मिले। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर मौन पालन कर स्नान करें और केले के वृक्ष को प्रणाम कर जल चढ़ाएं। इसके बाद हल्दी की गांठचने की दाल और गुड़ समर्पित करें। कुंकूअक्षतपुष्प आदि चढ़ाएं और परिक्रमा करें। इस बात का ध्यान रखें कि घर के आंगन के वृक्ष को छोड़ बाहर किसी जगह लगा हो केला का वृक्ष वहां पर ये पूजा करनी चाहिए। इस तरह पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते है। जिससे आपको मनवांछित फलों का प्राप्ति होती है।.

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 27, 2018

गुरुवार, 26 जुलाई 2018

गुरु पूर्णिमा पर विशेष स्वस्ति प्रार्थना

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Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 26, 2018

।। आज का राशिफल 27 जुलाई 2018

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।। आज का राशिफल 27 जुलाई 2018 ।।

।। पंडित आशीष त्रिपाठी ।।

मेष (Aries)
सुख के साधन जुटेंगे। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। थकान रहेगी। आय बढ़ेगी।

वृष (Taurus)
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। तंत्र-मंत्र में रुचि बढ़ेगी। राजकीय बाधा दूर होगी। चिंता रहेगी।

मिथुन (Gemini)
लेन-देन में सावधानी रखें। चोट, चोरी व विवाद आदि से हानि संभव है। जोखिम न लें। धैर्य रखें।

कर्क (Cancer)
जल्दबाजी से हानि होगी। विवाद न करें। कष्ट संभव है। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। लाभ होगा।

सिंह (Leo)
शत्रु परास्त होंगे। भूमि व भवन संबंधी बाधा दूर होकर लाभ की स्‍थिति बनेगी। प्रेम-प्रसंग अनुकूल रहेंगे।

कन्या (Virgo)
ऐश्वर्य पर व्यय होगा। मनपसंद भोजन का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा।

तुला (Libra)
व्यर्थ भागदौड़ रहेगी। दु:खद समाचार मिल सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य कमजोर रहेगा।

वृश्चिक (Scorpio)
लेन-देन में सावधानी रखें। प्रयास सफल रहेंगे। मान-सम्मान मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा।

धनु (Sagittarius)
बेचैनी रहेगी। मेहमानों का आगमन होगा। शुभ समाचार मिलेंगे। मान बढ़ेगा। प्रसन्नता रहेगी।

मकर (Capricorn)
शारीरिक कष्ट संभव है। रोजगार मिलेगा। भेंट व उपहार की प्राप्ति होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी।

कुंभ (Aquarius)
स्वास्थ्य पर खर्च होगा। उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। लाभ कम होगा।

मीन (Pisces)
विरोध होगा। डूबा हुआ पैसा मिल सकता है। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ होगा।

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 26, 2018

आपकी कमजोरी और छठा भाव ?

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आपकी कमजोरी और छठा भाव ?
कुंडली का छठा भाव जिसे ख़राब भावो के रूप में देखा जाता है | आपके जीवन में ऋण रोग शत्रु कम या ज्यादा होंगे आपके जीवन में कौन समस्या पैदा करेगा और कैसे आप इनका सामना करेंगे , यह सब छठे भाव से पता चलता है |
लेकिन जीवन में उन्नति करने के लिए छठे भाव को काफी महत्वपूर्ण माना गया है | छठा भाव जातक की कमजोरी को भी दर्शाता है | छठे भाव पर यदि आप नियंत्रण कर ले तो आपको उन्नति करने से कोई नहीं रोक सकता है | जैसे मिथुन लग्न की कुंडली में वृश्चिक राशि छठे हुई और इसके स्वामी मंगल देव जो आपके गुस्से को दर्शाते है यदि आप अपने गुस्से या आक्रामकता पर नियंत्रण कर लेते है तो आप अपने बनते काम कभी बिगड़ने नहीं देंगे नहीं तो आप अपने गुस्से से बनते कामो को अक्सर बिगाड़ देंगे |

और एक बात यदि छठे भाव वृश्चिक राशि में कोई ग्रह बैठा है तो फिर उसका भी ध्यान रखना होगा जैसे यदि इस मिथुन लग्न की कुंडली में ही वृश्चिक रही छठे भाव में बुध देव स्थित है तो आपको अपने बुद्धि और विवेक को भी ध्यान रखना होगा | आप अपने गुस्से में अपने बुद्धि और विवेक को भी खो देंगे | ऐसा अक्सर होता है की जब किसी को भी गुस्सा आता है तो वो अपना विवेक खो देता है लेकिन यहाँ पर भाव यह है की एक तो आप अपने गुस्से से बनते काम बिगाड़ देंगे दूसरा दूसरे लोग आपका फायदा भी उठायंगे जो आप के लिए नुकसान देह होगा ऐसे में आप बैगैर गुस्सा किये अपने विवेक से अपने काम करते रहे |
छठा भाव और उसका स्वामी        कमजोरी
छठा भाव और सूर्य               अहंकार घमंड
छठा भाव और चंद्रमा              मन की चंचलता
छठा भाव और मंगल              क्रोध
छठा भाव और बुद्ध                बुद्धि और विवेक
छठा भाव और गुरु                ज्ञान शिक्षा
छठा भाव और शुक्र               सुन्दरता कामुकता विलाशिता
शनि                           आलस्य
अब अगर आप अपनी कमजोरी को पहचान गए और उस पर नियंत्रण कर लिया तो आप अपने जीवन में सफल हो सकते है | साथ ही अन्य ग्रहों की युति द्रष्टि और योग भी कुंडली में अपना प्रभुत्व रखते है इन पर विचार जरुरी है |   
    

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 26, 2018

सास बहु और साथ !

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सास बहु और साथ तीन ऐसे शब्द है जो साथ में प्रेम पूर्वक कम ही देखे जाते है / जब भी किसी लड़कीका रिश्ता उसके माँ बाप तय करते है तो भी उनकी पहली प्राथमिकता यही होती ही की बेटी की सासकैसी है कही वो तेज़ तर्रार तो नहीं है / और लडकियों की भी यही जिज्ञासा रहती है की मेरी सासटिपिकल सास  हो जो बात बात पर ताने दे और मेरा जीना हराम कर दे / और ये डर हर लड़की के मनमष्तिक में घर किये रहता है / क्यों पैदा होता है ये डर और कौन पैदा करता है ये डर / इसका जवाब भीहर कोई नहीं जनता है / लेकिन यही डर लिए हर लड़की अपने ससुराल में पाव रखती है और सास कीकही गई एक एक बात में उसको वही टिपिकल सास नज़र आती है / और धीरे धीरे दोनों के बीच का गैपबढता जाता है / कुछ मामलो मे यही डर घरेलु हिंसा और दहेज़ प्रताड़ना के झूठे केस के रूप में समाज केसामने  जाता है / जबकि यही बात घर की चार दिवारी के अन्दर भी सुलझाई जा सकती थी /एक ऐसे ही मामले में सपना शादी के तीन महीनो बाद ही घर  गई और उसने अपने सास ससुर नन्दऔर पति के खिलाफ दहेज़ की मांग और घरेलु हिंसा में मुकदमा लिखा दिया सपना ने बताया की वोअक्सर अपनी सहलियो से सुना करती थी की उनकी सास उनसे कैसा बरताव करती थी कैसे रुखे पन सेउनसे बोलती थी तब मैं यही कहा करती थी की मै तुम लोगो की तरह नहीं हु जो अपनी सास से डरु /और शादी के बाद मुझे अपनी सास में अपनी सहेलियों द्वारा बताई गई सास ही दिखाई देती औरउनकी हर एक बात बुरी लगती / बात सुबह जल्दी उठने को लेकर शुरू हुई जो एक दिन बड़ी बहस कारूप ले लेती है और बातो ही बातो में मैने सास को कुछ ज्याद ही जवाब दे दिए और सास ने मुझे गाल परतमाचा जड़ दिया मैने उस दिन दिन भर खाना नहीं खाया और रात में पति विकास से सारी बात बताईऔर अकेले रहने की जिद करने लगी और उनसे भी मैने गुस्से में कुछ ज्यादा बोल दिया और उन्होने भीमेरी पिटाई कर दी गुस्से में रात में ही मै अपने मायके  गई बिना किसी को बताय / घर पर मेरीऔर सबकी मर्ज़ी से उनको सबक सीखने के बात तय हुई और पुलिस में दहेज़ प्रताड़ना और घरेलू हिंसाकी रिपोर्ट दर्ज करवाई जिसमे पति,सास ससुर नन्द और देवर का नाम लिखवाकर मुकदमा दर्ज करवादिया गया / ये बात घर की चार दिवारी के अन्दर भी सुलझाई जा सकती थी लेकिन बात सलाखोंके बीच में आने से दो परिवारों के आपसी रिश्ते टूट गए /
क्या शादी से पहले किसी बात पर सपना की माँ ने उसे तमाचा नहीं मारा होगा ,क्या उसके भाई ने कभीउससे गुस्से में नहीं बोला होगा लेकिन तब सपना ने कुछ क्यों नहीं किया जब ससुराल में सास और पतिने मारा तो घरेलू हिंसा और जब मायके में मारे तो प्यार से मारा शायद आज कल की बहुए ससुराल कोकभी अपना घर मान ही नहीं पाती है , मानती तब है जब वो पति के साथ अकेले रहने लगती है /
इसमे अगर दूसरा पछ भी देखा जाय की सास की भी गलतिया होती है ,सास भी जो एक बेटी की माँ भीहोती है लेकिन वो हमेशा अपनी बहु को बहु ही मानती है  की बेटी / और अपनी सास द्वारा दिए गएअच्छे और बुरे अनुभवों को वो अपनी बहु पर इस्तेमाल जरुर करती है जबकि एसा नहीं होना चाहिएलेकिन ज्यादातर मामलो में यही होता है जो एक बड़ा कारण है सास और बहु के रिश्तो में खटास आनेका सास अपनी बेटी को जिन बातो पर छुट देगी उन्ही बातो पर अपनी बहु को बाते सुनना नहीं भूलतीक्यों ? क्योंकि सास अपनी बहु के साथ सास के रूप में खेलने के लिए हमेशा तैयार रहती है यही अंतरऔर सोच दोनों के रिश्तो के बीच दीवार बनकर खड़ा रहता है /
सयुंक परिवार प्रथा में भी सभी एक साथ रहते थे और कभी कदार तो एक बहु को दो से तीन सासों कासामना करना पड़ता था तीन सासे ऐसे की ताई सास चचिया सास और अपनी सास तो होती ही थीलेकिन फिर भी उस समय ऐसे मामले कम ही सामने आते थे कारण सभी मामले घर के अन्दर सुलहऔर समझौते से सुलझा लिए जाते थे और दूसरा कारण अपने से बड़ो के लिए आदर और सम्मान होताथा जो उन्हे अपने माँ बाप से मिलता था /
आज वही संस्कार आदर और सम्मान बच्चो को अपने माँ बाप से नहीं मिल रहा है / कारन पश्चिमीसभ्यता की और बढता रुझान / बच्चे के पैदा होने के बाद के कुछ महीनो के बाद ही और कुछ जगह तोतुरंत ही माँ बच्चो को डब्बा बंद दूध पिलाने लगती है अपन स्तनपान नहीं कराती ,कारण उनका फिगरख़राब हो जायेगा ऐसा वो सोचती है और बार बार बच्चे पेशाब और मल  करे इसलिय डैपर्स का प्रयोग ,तीसरा कारण बच्चे कुछ और बडे हुए तो उन्हे दादी और मम्मी के मुह से कहानी सुनकर सुलाने कीजगह टी.वी चैनेल्स पर आने वाले कार्टून दिखा कर सुलाना / जब माँ का स्पर्श बच्चे पर कम होगा तो माँके शरीर से निकलने वाली ममतामई किरणे बच्चे तक पहुचेंगी ही नहीं और दोनों के बीच सिर्फ रिश्तोका प्यार होगा ना की दिलो का प्यार / और संस्कार जो माँ बाप से आने चाहिये थे वो टी वी चैनेल्स सेसीखते है बच्चे /
और बडे होने पर बच्चे का देर तक सोना और उठकर कालेज जाना फिर मस्ती और मौज करना ये हीचलता रहता है और देर रात तक सोना जिसमे ,माँ बाप से कम मिलना हो पाता है जो भी एक बड़ा कारणहै संस्कार   पाने का / और यही इन बच्चो की जीवन की दिनचर्या में भी शामिल हो जाता है /
लडके और लडकियों दोनों ही आज के समाज में इस तरह ही जी रहे है लेकिन लडको के मामलो में लडकेतो शादी के बाद भी वैसे ही जीवन जीते रहते है लेकिन लड़किया जब किसी के घर की बहु बनती है तोउन पर सुबह जल्दी उठाने का दवाब घर का कम करने का दवाब और रोज़ रोज़ घूमने की जगह महीनेऔर हफ्ते में कभी घूमने जाना ये सब उसकी दिल पर गहेरा अघात करते है और वो सास को दूसरी हीनिगाहों से देखने लगती है / क्योंकि उसकी जिंदगी में तो देर से उठाना घर का काम  करना और रोज़रोज़ घूमना फिरना शामिल था लेकिन ये क्या क्या मैं किसी जेल में  गई हु ऐसी सोच उसे ससुराल कोकभी घर मनाने की इज़ाज़त नहीं देती है / साथ ही संस्कारो की कमी दिली रिश्तो को नहीं मानती औरउसे ऐसे रिश्ते तोडने में जरा भी दर्द नहीं होता है / और इन वजहों से ही घर में आए दिन सास और बहु केझगडे , पति पर अलग रहने का दवाब पति मान गया तो ठीक नहीं तो लड़ाई बड़ती है और धीरे धीरे वोघरेलु हिंसा और दहेज़ प्रताड़ना के रूप में सामने आती है /
ऐसे मामलो में मयको वालो का भी बराबर जुर्म होता है जो बराबर अपनी बेटी की बातो को मान लेते हैऔर उसका साथ देते है उसकी इस झूठी लड़ाई में / लड़की ससुराल जाने के बाद भी मायके के नियम परचलना चाहती है और इन्ही कारणों से समाज में नित्य इसे रिश्ते टूट रहे है /
ये सच है की माँ का दर्ज कभी सास नहीं ले सकती और बेटे का दामाद ! लेकिन क्या हम अपनी सोच मेंबदलाव नहीं ला सकते है ,यही सोच हमेशा बनी रहती है की वो मेरा दामाद है  की बेटा और वो मेरीसास है मेरी माँ नहीं जो उसकी हर बात मैं मान लू / इन्ही कारणों से आपसी रिश्ते उतने मजबूत नहीं होपाते है /
अब जरुरत है तो लड़की के मन से उस डरउस समझ और सोच को निकालने की जो शादी से पहले अपनेआस पास सुनती है /
सास बड़ी बेहूदा और रुखड़ होती है /
ससुराल कभी तुम्हारा अपना घर नहीं हो सकता /
ससुराल और मायके में रहन सहन का अंतर /
और बड़ी बात की ससुराल की छोटी से छोटी बातो को मायके से बाटना और उसी दिशा निर्देशों का पालनकरके ससुराल में चलना ,भी एक बड़ा कारण है रिश्तो के टूटने का /
सास बिना ससुराल सुनने में तो अच्छा लगता है लेकिन एक सास बिना ससुराल वीरान हवेली की तरहहोता है एक बीन मूर्ति के मंदिर की तरह होता है , बिन फूलो के बगीचों की तरह होता है
सास जब अपने अनुभवों को अपनी बहु से बताती है और पल पल पर उसका दिशा निर्देश करती हैसमाज में कैसे एक बहु को रहना होता है वो सिखाती है सास , और जब सास बिना ससुराल होगा तोनित्य नई नई मुश्किलों से सामना होता है बहु का /.लेकिन आज कल की बहूओ में इस बात की ही समझऔर संसकारो की कमी है / एक परिवार कई रिश्तो से मिल कर बनता है ठीक वैसे ही जैसे बगीचे में तरहतरह के फूल होते है सिर्फ पति पत्नी और बच्चो से परिवार नहीं बनता हैबनती है तो आज की फॅमिली !गुलाब को फूलो का राजा कहा जाता है और गुलाब की खुशबु भी बहुत खूब होती है लेकिन गुलाब जबनिकलता हैं तो उसकी डंडी (कलम ) से लेकर कली तक पहुचने में काटे ही काटे होते है जो कभी कभीचुभने में लग भी जाते है लेकिन गर गुलाब मिल जाए तो उसको कही भी इस्तेमाल किया जा सकता है /पहले के समय में फोट खीचने के बाद अंधेरे कमरेडार्क रूम )में निगेटिव धुला जाता था फिर एक प्यारीसी तश्वीर निकल कर आती थी तो सभी खुश हो जाते थे / अगर हम इन्सान की बुराइयों को देखंगे तोउसमे हजारो की जगह लाखो बुराइयों दिखेंगी और अगर हम खूबी देखेंगे तो हमें खुबिया ही दिखेंगी /
ASHISH TRIPATHI
KANPUR
UTTER PRADESH

Posted By PT ASHISH TRIPATHIजुलाई 26, 2018