ज्योतिषी बदल सकता है जातक का व्यक्तित्व / प्रालब्ध --
कई ज्योतिषी कहते हैं कि आप किसी का भाग्य नहीं बदल सकते, लेकिन मैं कहता हूं कि वे ज्योतिष को नहीं समझते।
ज्योतिष कर्म संरेखण है, ज्योतिष में सब कुछ ग्रह है
Planet शब्द में PLAN शब्द है
अतः ग्रहों की योजना बनाई जा सकती है, इसके लिए ग्रहों का विस्तार से अध्ययन करना आवश्यक है
यदि कोई ज्योतिषी ग्रह सक्रियण और निष्क्रियता कर सकता है तो वह किसी का भी भाग्य बदल सकता है
उदा. शनि के शत्रु ग्रह रवि और मंगल हैं, यदि कोई जातक शनि की साढ़ेसाती से पीडित है तो जातक को शनिवार के दिन लाल रंग होगा।
उन्हें रंगीन कपड़े पहनाएं (रवि और मंगल के लिए), साढ़े साती से कोई दिक्कत नहीं है, यानी क्या किया, शनि को निष्क्रिय करने के लिए रवि और मंगल का प्रयोग किया गया।
आइए एक और उदाहरण देते हैं ताकि हम कर्म संरेखण को समझ सकें
कुछ दिन पहले मैंने एक बंगाली सुनार की कुण्डली देखी, वो व्यक्ति पिछले 3 साल से बीमार था, बहुत से वैद्यों ने उसका इलाज किया पर उसकी बीमारी ठीक नहीं हो रही थी, क्या बीमारी ठीक होगी? कुंडली मेरे पास यह देखने आई थी।
वृश्चिक लग्न कुण्डली थी और छठवें भाव में मंगल युवावस्था में मेष राशि में था यानि लग्नेश मंगल रोग उत्पन्न कर रहा था, इसका अर्थ है कि व्यक्ति के कर्म भाग में मंगल का प्रबल प्रभाव हो रहा है इसलिए वह बीमार हो रहा है, तो इसमें कर्म संरेखण तकनीक का प्रयोग किया जाता है स्थान।
मैंने उससे पूछा कि तुम कैसे सोते हो? उस पर उन्होंने कहा कि हम एक कमरे में 8 से 10 सोते हैं, और सभी मैट पर सोते हैं, भूमि का मतलब मंगल होता है और वह भूमि पर सो रहा है मतलब मंगल से जुड़ रहा है, वह बीमार हो रहा है, मैंने उसे एक छोटा बिस्तर लाने और उस पर सोने के लिए कहा। यह।
वहीं, मंगल को निष्क्रिय करने के लिए बुध मंगल का शत्रु है, इसलिए हमने हरी चादर लेने को कहा
वह उसी दिन बिस्तर ले आया और उस पर सोने लगा, 3-4 दिनों में ही उसे फर्क महसूस हुआ और वह बेहतर महसूस करने लगा।
ऐसे कई उदाहरण हैं इसलिए एक ज्योतिषी को कुंडली के माध्यम से कर्म संरेखण को समझना चाहिए और ग्रहों को सक्रिय और निष्क्रिय करना चाहिए।
ग्रहों के षडबल का प्रयोग करने पर ग्रहों को सक्रिय किया जा सकता है और यदि ग्रह के शत्रु ग्रह का प्रयोग किया जाता है तो ग्रहों को निष्क्रिय किया जा सकता है।
वहीं इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि ग्रह का सदुपयोग किया जा सके तो ज्योतिषी किसी का भी भाग्य बदल सकता है
विषय को अच्छी तरह से समझने के लिए एक उदाहरण भी दिया जाता है
एक भाव में हजारों घटनाएं होती हैं लेकिन जब दशा आती है तो उस भाव में केवल एक ही घटना होती है, लेकिन यदि ज्योतिषी उस भाव को पहचान कर उस भाव में एक और शुभ घटना रचता है तो कोई भी अशुभ घटना नहीं होती है।
जातक की शुक्र की दशा शुरू होती है, शुक्र की दशा 20 वर्ष की होती है और शुक्र तुला राशि में अष्टम में होगा (जिस घर में ग्रह स्थित है वह दशक के दौरान मजबूत परिणाम देता है और तुला शुक्र की मूलत्रिकोण राशि है, मूलत्रिकोण में ग्रह 100 प्रतिशत परिणाम दें) तो ऐसी स्थिति में दशा में बीमारी, दुर्घटना, हानि और यातना जैसी घटनाएँ होंगी और हम कितनी भी कोशिश कर लें, हम इन 20 वर्षों में इससे छुटकारा नहीं पा सकते हैं, तो क्या फायदा ज्योतिषी अगर वह व्यक्ति को सलाह देता है कि "आपको अपने भाग्य को भुगतना होगा"?
ऐसे समय में ज्योतिषी को कर्म संरेखण की पहचान करनी चाहिए और अष्टमा में शुभ घटना को घटित करना चाहिए ताकि उस घटना से बचा जा सके जो वर्तमान में व्यक्ति को परेशान कर रही है, जैसा कि अष्टमा से गुप्त बातें और रहस्यवाद समझा जाता है, इसलिए यदि व्यक्ति को ऐसा करने के लिए कहा जाए शुक्र के लिए गुप्त लक्ष्मी साधना हो या रहस्यवाद का अध्ययन करने के लिए अष्टमा में अशुभ घटना घटित होगी नहीं और 20 वर्ष का वह दशक सुखपूर्वक बीत जाता है
तो मैं आपको बताउंगा कि ज्योतिष को ठीक से समझ लें और किसी विशेषज्ञ से मार्गदर्शन लें, तो कुछ ही दिनों में आप अपने जीवन में खुशियों का निर्माण कर सकते हैं.... ॐ नमः शिवाय
🌸डॉ नरेंद्र धारणे , ज्योतिषविद्या वाचस्पती / PhD / लेखक -नासिक










