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1 नीचस्थ ग्रह जिस राशि में हों उस राशि का स्वामी यदि उच्चस्थ हो तो नीच भंग राजयोग बनता है।
2 नीच का गरह यदि नवमांश कुंड्ली में जाकर उच्चस्थ हो जाता है, तब भी ग्रह का नीच भंग हो जाता हैं और ग्रह राजयोग के जैसा फल देता है।
2 जिस राशि में ग्रह नीचस्थ हों उस राशि का स्वामी स्वग्रही होकर जन्मपत्री में स्थित हों तो नीचभंग राजयोग बनता है।
3 नीचस्थ राशि में स्थित ग्रह से सातवें भाव में नीचस्थ ग्रह स्थित हो तो दोनों ग्रहों का नीचभंग होता है, और यह उच्चस्थ ग्रह से भी बेहतर फल देता है।
4 ग्रह जिस राशि में नीच का हो रहा हों उस राशि का स्वामी यदि चंद्र से केंद्र में स्थित हों तो भी नीचभंग राजयोग बनता है।
5 नीच भंग राजयोग में यह नहीं समझना चाहिए कि ऐसे जातकों का जन्म धनाढ़य राजघरानों में होता हैं बल्कि ऐसा व्यक्ति अपने पुरुषार्थ से धनाढ़य बनता है। ऐसे जातकों की सफलता का श्रेय स्वयं व्यक्ति को ही दिया जाता है। जन्मपत्री में एक से अधिक ग्रहों का नीचभंग होना अतिशुभ माना जाता है। ऐसे योग व्यक्ति को सफलता की ऊंचाईयों पर लेकर जाते हैं।
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ज्योतिष आचार्य आनन्द जालान










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