आपका धन मुख्यतः कहाँ खर्च होगा
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✔️ धनेश के लग्न में होने पर जातक खुद के ऊपर अधिक खर्च करता है।
✔️आचार्य आनन्द जालान के अनुसार धनेश के धन भाव में ही होने पर जातक का धन कुटुंब, परिवार,मित्र,खाने पीने आदि के ऊपर अधिक खर्चा होता है।
✔️धनेश तृतीय भाव में हो तो जातक अपना धन अपने छोटे भाई बहनों,नौकर - चाकर पर खर्च करता है।
✔️ धनेश के चतुर्थ भाव में होने पर जातक अपना धन अपनी सुख सुविधा की चीजो को खरीदने में करता है।
✔️ धनेश के पंचम भाव में होने पर जातक का धन संतान, शिक्षा,कालेज, प्रेम आदि पर खर्च होता है।
✔️ धनेश के छठे स्थान में होने पर जातक का धन रोग, शत्रु, त्रण में खर्च होता है।
✔️ आचार्य आनन्द जालान के अनुसार धनेश के सप्तम भाव में होने पर जातक का धन पत्नी पर विशेष रूप से खर्च होता है।
✔️ धनेश के अष्टम में होने पर जातक का धन गुप्त विद्या सीखने पर खर्च होता है।
✔️ धनेश के नवम में होने पर जातक का धन धर्म, धार्मिक कार्य, मंदिर,साला,साली आदि पर खर्च होता है।
✔️ धनेश के कर्म स्थान में होने पर जातक अपना धन सम्मान, प्रतिष्ठा कमाने के लिए खर्च करता है।
✔️ धनेश लाभ स्थान में हो तो जातक का धन अपनी विभिन्न इच्छा पूर्ति, चाचा, बडे़ भाई बहन पर खर्च होता है।
✔️ धनेश के द्वादश भाव में होने पर जातक का धन अस्पताल, बीमारी, यात्रा,सांसरिक सुख पर खर्च होता है।
आचार्य आनन्द जालान दिल्ली निवासी










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