हमने जाना कि पित्र शांति के उपाय पर भी लाभ क्यूँ नहीं हो रहा है .इस अंक में हम यह समझेंगें कि किन लक्षणों से जाना जाय कि हमारे पित्र के साथ बाहरी शक्तियां भी जुड़ गयी हैं
१. जब आपके या आपके परिवार के साथ अचानक कोई रोग , दुर्घटना , हानि , अपयश , विवाद , शुरू हो जाय और आपकी कुंडली में पितृ दोष भी हो तब आप यह मान लीजिये की आपके पितरो के साथ बाहरी शक्तियां भी जुड़ गयी हैं
२. जब आपके घर में प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले खर्च से अधिक खर्च हो बचत योग्य आय होने पर भी भविष्य हेतु कुछ ण कर पाए , बनते काम अचानक बिगड़ जाय , संतान दुष्ट प्रवृति अथवा नशे आदि में लिप्त हो जाए जबकि आपके खानदान में नशा और अपराध , युद्ध का इतिहास न रहा हो तो आप समझ ले की आपके पितरो के साथ बाहरी शक्तियां भी जुडी हो सकती हैं
३. यदि गर्भ में कई लोगो के परिवार में मृत्यु हो , युवाओं के साथ दुर्घटनाएं हो और परिवार के मांगलिक कार्यों में बाधा आ रही हो विशेष कर संतानों को कोई भी समस्या हो रही हो उन्नति न हो रही हो तो आपको समझना चाहिए की आपके पितरो के साथ बाहरी प्रभाव भी हो सकते हैं
उपरोक्त सभी प्रकार की समस्याएं बाहरी शक्ति का प्रभाव होने पर अचानक और बहुत तीव्रता से उत्पन्न होती है तथा हानि भी अधिक करती है जबकि सिर्फ अपने पित्र होने पर पितृ दोष में होने वाली सम्सयायें बहुत धीरे धीरे होती है जिनका प्रभाव अक्सर समझ में नहीं आता एक दो पीढ़ी के बाद इसका स्पष्ट प्रभाव दिखता है क्युकी अपने पितृ कितने भी रुष्ट हों वह कम हानि की कोशिश करते हैं
सामान्य राहत के लिए काली जी की उपसना करे और प्रत्यंगिरा मन्त्र का जप करें
किसी योग्य से मार्गदर्शन लेकर पूर्ण उपाय करें. [मुक्ति मार्ग ]










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