शनिवार, 11 अगस्त 2018

1947 आज़ादी On The Paper Part 2 पर्दाफाश :-

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1947 आज़ादी On  The Paper Part 2 पर्दाफाश :- 
हमने बचपन से ही अखबारों और न्यूज़ में सुना था की कागजों पर ही पुल बन गए या कागजों पर ही तालाब  खोद दिए गए | न जाने कितनी योजनाये On  The Paper होकर ख़त्म भी हो गई |सब कुछ On  The Paper ! लेकिन इसका मतलब पहले तो समझ ही न आया लेकिन जब बड़ा हुआ तो समझा की पेपर या कागजों पर योजना कैसे चलती है और अधिकारियो और नेताओ को कैसे लाभ होता है |कोई भी योजना आई और उससे इतने लोगो को लाभ हुआ लेकिन सिर्फ कागज़ी कार्यवाही में |कोई कुछ भी कहे लेकिन On  The Paper अर्थात रेकॉर्ड या सबुत के तौर पर सब मौजूद होता है |हकीकत में लाभ किसी को हुआ ही नहीं लाभ हुआ तो सिर्फ अधिकारी और नेताओ को !
ऐसे ही न जाने कितनी योजनाये  आई और चली गई तालाब खोदे गए सड़के बनी पुल बने पौधे रोप गए लेकिन सब कुछ On  The Paper !
नेता और अफसर सब मलाई खाते रहे और जनता धोखा !
सब कुछ On  The Paper !
लेकिन यह दिमाग आया कहा से की कुछ करो मत सब लिखापड़ी में रखो की जब कोई मांगे तो दिखाने  के लिये है  ये कार्य हुआ अब कहा हुआ ये कोई नहीं पूछेगा |क्योंकि जनता तो पूछेगी नहीं उसको इतना मालूम ही नहीं है जिसने यह आज तक न पूछा की हमें आज़ादी कैसे मिली और किसने दिलाई ?
यहाँ सवाल मन में कौंध रहा था की यह धोखेबाज़ी  का दिमाग आया कहा से की On  The रिकॉर्ड या कागजों में सब कुछ दिखा दो फोटो दिखा दो शोर मचा दो न्यूज़ में चला दो बस जनता चार दिन बाद सब भूल जाएगी सिर्फ उनको जाति और धर्म के नाम पर लडवा दो |लेकिन इन सब के बीच कई सारे  सवाल  मन में उठ रहे थे और यह सवाल १९४७ की आज़ादी से जुड़े सवालों से भी जुड़ता चला गया |तब का इतिहास और चीज़े और अभी वर्तमान का सब कुछ उल्टा पुल्टा !सब कुछ उलझा हुआ |सवाल दर सवाल बड़ते ही जा रहे थे | इनमे से कुछ सवाल जो अहम् थे
सवाल नंबर एक :-
यह किसकी सोच थी की हमारी पवित्र माँ गंगा और नदियों में टेनरियो का दूषित पानी साथ ही नालो और नालियों को भी नदी और गंगा जी में गिरा दिया जाए !और उसे पूरी तरह से दूषित कर दो|
सवाल नंबर दो -
कैसे धीरे धीरे अंग्रेजी को प्रचलन में लाकर हमारी मात्र भाषा को पीछे कर दिया गया |अंग्रेजी ही सर्वोपरि हो गई कैसे ?
कैसे इंग्लिश ने हमारे चारो ओर एक घेरा बना लिया जिससे हम निकल ही नहीं पा रहे है |
सवाल नंबर तीन -हमारी राष्ट्र भाषा को सिर्फ कागजों में ही राष्ट्र भाषा का अधिकार प्राप्त है क्यों ? जबकि सविंधान आज़ादी के बाद लिखा गया |
सवाल नंबर 4 - कैसे हमारे इतिहास को तोडा मरोड़ा गया और वीर शहीदों की जगह मुगलों को महान बताया गया !
सवाल नंबर ५ - कैसे धीरे धीरे संस्कार संस्कृति और धर्म को पंगु बना दिया गया |
सवाल नंबर ६ :- कैसे भारत वर्ष को इण्डिया और भारतीयों को इंडियन बना दिया गया ! कैसे भारत का अर्थ इंग्लिश में इण्डिया कर दिया गया !
ऐसे ढेरो सवालों का जवाब जो शायद मिल ही न पाए |बचपन से हमने सुना की हमें आज़ादी मिली लेकिन कैसे क्या चंद्र्शेखर  भगत सिंह या फिर सुभास चन्द्र बोस  ने या फिर गाँधी जी के सत्याग्रह ने ! किसने हमें आज़ादी दिलाई !
क्या आज़ादी इन शर्तो पर मिली थी की हम ( अँगरेज़ ) चले जायेंगे लेकिन अंग्रेजी बनी रहेगी सत्ता और कानून में हमारा दखल बना रहेगा |आज़ादी On  The Paper कागजों में इन शर्तो पर मिली थी की आज़ादी के बाद हम अपने  इतिहास को धीरे धीरे भुला देंगे और आने वाली पीड़ी इतिहास और अपने पर्वो में दिलचस्पी ही ना दिखाएगी    |आज़ादी इन शर्तो पर मिलेगी की आप अपने संस्कारो और संस्कृति को धीरे धीरे भूल जायेंगे |आने वाली युवा पीड़ी को ये त्यौहार एक बोझ समझ में आयेगा |अपनी पवित्र माँ गंगा को दूषित कर देना ताकि एक दिन आपके ही लोग उस जल से जिससे वो अपने पाप धोते है एक दिन उसके पास जाने से भी कतरायेंगे और उसे गंगा जल की जगह गन्दा जल कहेंगे |आज़ादी इन शर्तो पर मिली थी की आप अपने आयुर्वेद को भुला देंगे और अंग्रेजी दवाइयों पार निर्भर हो जायेंगे | आप अपने सत्तू निम्बू पानी दही मट्ठा और दूध को भूल कर सॉफ्ट ड्रिंक शराब बियर और पिज़्ज़ा बर्गर जैसे पश्चमी व्यंजनों को पसंद करेंगे |आज़ादी इन शर्तो पर मिली की जिस भारतीय शिक्षा पर विश्व नाज़ करता है जहा दुनिया का पहला विश्वविद्यालय हो जहा ६८ विभिन्न विषयों के योग्य आचार्य हो उस शिक्षा व्यवस्था को ही भ्रष्ट कर दो और इंग्लिश स्कूलों पर निर्भरता ज्यादा हो और सरकारी स्कूलों पर कम !
पूरा शिक्षा तंत्र विदेशी शिक्षा पर निर्भर हो जाए |
आज़ादी इन शर्तो पर मिली की स्वास्थ शिक्षा संस्कृति और संस्कार को खोखला करके पश्चिमी सभ्यता सबके सर चढ़ कर बोले |
हमारा भारत कब इण्डिया बन गया और हम भारतीय कब इन्डियन हो गए पता ही नहीं चला | कब हम शर्म को छोड़कर बेशर्मी की चादर ओड़ने लगे पता ही न चला |हमारी मात्र भाषा कब कमज़ोर होने लगी और अंग्रेजी भाषा कब मजबूत हो गई पता ही न चला |हमारे भारतवर्ष का नया वर्ष कब होता है और क्यों मानते है युवा पीडी को पता ही नहीं वो तो सिर्फ अंग्रेजी नए  साल में पार्टी ही जानते है ! युवा पीडी को आदर सत्कार और संस्कार कब से देना बंद कर दिया पता ही नहीं किसी को |कब पूजा पाठ से अपने युवा पीडी को दूर करते चले गए और कब वो मॉडर्न हो गए ये पता ही नहीं किया | लेकिन हम आजाद ही थे की किसी और गुलामी की और बड रहे थे ये सवाल भी हम इंडियन नहीं पूछ पाए क्योंकि हम लोकतान्त्रिक देश में जो थे !
गावों में जहा सभ्यता और संस्कार की गहरी जड़े थी  आज वहा पर भी ऐसा कुछ नहीं है वो सब जो अपनो को प्यार करते थे चाचा और बाबा के रूप में संयुक्त परिवार में रहते थे आज एकल परिवार में चले गए कैसे ? आज़ादी से पहले जहा संस्कार और संस्कृति आदर और सत्कार की गहरी जड़े और गहरी हो रही थी आज़ादी मिलने के  बाद वो धीरे धीरे कमज़ोर होने लगी क्योंकि उन जड़ो में पश्चिमी सभ्यता रूपी मट्ठा  जो घोला जा रहा था |
यह बात २ फ़रवरी १८३५ को ब्रिटेन की संसद में लार्ड मैकाले के द्वारा  दिए गए उस संवाद से भी सिद्ध होती है जिसमे उसने कहा मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया, जो भिखारी हो, जो चोर हो। इस देश में मैंने इतनी दौलत देखी है, इतने ऊँचे चारित्रिक आदर्श और इतने संस्कारी मनुष्य  देखे हैं की मैं नहीं समझता की हम कभी भी इस देश को जीत पाएँगे । जब तक इसकी जड़ो को खोखला नहीं किया जाता  जो इनकी  आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत है और इसलिए मैं ये प्रस्ताव रखता हूँ की हम इसकी प्राचीन  और पुरातन शिक्षा व्यवस्था, उसकी संस्कृति को बदल डालें, क्यूंकी अगर यह  भारत के लोग यह सोचने लगे की जो भी विदेशी और अंग्रेजी है वह उनसे बेहतर है वे अपने गौरव गाथा , आत्म सम्मान और अपनी ही संस्कृति को भुलाने लगेंगे और वैसे बन जाएंगे जैसा की  हम उन्हें बनाना चाहते हैं । एक ऐसा भारत जो पूरी तरह से गुलाम तो होगा लेकिन वो गुलामी उनको कभी दिखाई भी नहीं पड़ेगी और आज़ादी के बाद हुआ भी ठीक ऐसा ही जैसा की उसने अपने दिए गए भाषण में कहा था |
आल इण्डिया रेडियो इंडियन एयर लाइंस इंडियन रेलवे ऐसे न जाने कहा कहा भारत से इंडिया हो गया |आज़ादी के सत्तर सालो बाद हम आज़ादी का जश्न तो मानते है लेकिन वो आज़ादी असल में गुलामी की नई गाथा लिखी जा रही थी |हमारे ज्योतिष जिसको वेदों की आँखे कहा जाता है उसे आज ठग विद्या के रूप में प्रचारित किया जा रहा है जिसे एक विषय के रूप में आज तक मान्यता नहीं मिली जबकि सभी बड़े से बड़े नेता ज्योतिषियों से मिल कर अपनी सत्ता का निर्माण करते है लेकिन उस विषय को मान्यता या बढ़ावा आज तक नहीं मिला क्यों |जाति धर्म और समुदाय  के आधार पर हमें पहले ही बाँट दिया गया | हिंदुस्तान को भारत और पाकिस्तान में फिर कश्मीर और बलूचिस्तान के विवाद में फंसा दिया गया हम इन विवादों में फसे रह गए और धीरे धीरे हमारी जड़ो को खोखला किया जाता रहा |आज की गुलामी १९४७ से पहले की गुलामी  से ज्यादा खतरनाक है |
आज़ादी के बाद ही हमारा संविधान लिखा गया उस आज़ादी के बाद जो हमें On  The Paper मिली थी |उस संविधान में ही लिखा गया इण्डिया That is  भारत ! India शब्द आया कहा से और कौन था जो भारत को इन्डिया बना कर गुलामी की नई परिभाषा लिख रहा था ? भारत में कई क्षेत्रीय भाषाए है  जैसे भोजपुरी कन्नड़ अवधि तमिल पंजाबी मलयालम सबको को उनके क्षेत्र के अनुसार व्यापक स्थान मिला लेकिन हमारी राजभाषा हिंदी को नहीं उसकी जगह इंग्लिश को ही प्राथमिकता दी जाती रही |ये कही न कही अंग्रेजो की साजिश का एक अहम् हिस्सा था की भारत को इंडिया और हिंदी को अंग्रेजी बना कर इसको गुलाम बना कर रखो !
भारत वर्ष जो अखंड था जो देवताओ का बसाया देश था भारत वर्ष के अखंड स्वरुप को खंड खंड किया जा रहा था |भारत वर्ष को इण्डिया किया जा रहा था और यहाँ के नौकर शाह और राज नेता सब चुपचाप तमाशा देख रहे थे क्यों ?क्या कोई ऐसी शर्त रखी गई थी जो उन्हें ऐसा करने से रोक रही थी |हमारे प्राचीन ग्रन्थ ऋषि मुनि शहीद स्वतंत्रता संग्रांम सेनानी संस्कृति हमारी खोज इन सबसे धीरे धीरे हमारा ध्यान हटाया जा रहा था |आरक्षण धर्म समुदाय क्षेत्र के आधार पर हमे खंड खंड किया जा रहा था |और हम कोल्हू के बैल की तरह आँख में पट्टी बांध कर घूम रहे थे और आज भी घूम रहे है |
अब सवाल यह है की हमें आज़ादी कौन दिला रहा था क्या कोई पिछले दरवाज़े से कोई साजिश कर रहा था या यह अंग्रेजो की कूटनीति थी जो हमें आज़ादी मिली !जो भारत सोने की चिड़िया कहलाता था  उसको गुलामी की जंजीरों में जकड़ा जा रहा था अप्रत्यक्ष रूप से |वर्ष १९४७ से आज तक हम आज़ादी का जश्न तो मना रहे है लेकिन ये कैसी आज़ादी जहा हमारी मात्र भाषा को दरकिनार कर दिया गया हो | जहा भारत को इण्डिया बना दिया गया हो || इस लेख में लिखी गई बाते सिर्फ सवाल है ना कि ऐसा हुआ था और इसे निजी विचारो के तौर पर ही देखे। किसी की भावनाएं आहत हो ऐसी कोशिश नही की है फिर गलतियों के लिए क्षमा ।