मरने के बाद यूँ याद किया तुमने
जैसे मेरे आदर्शो की सीख तुममे बाकी है
राह गुज़र गई लेकिन मंज़िल अभी बाकी है ।
राजनीति में आया था कुछ सोचकर
माँ भारती का झुका शीश गर्व से उठाने को
मुझे क्या पता था राजनीति ऐसे होती है
जहाँ मरने के बाद भी वोटो की गिनती होती है।
किसके मरने या मारने पर कितना फायदा होगा
उसके अस्थि कलश को घुमाने में कितना वोट आएगा।
चलो मौन राजनीति करते है
चलो मौत पर राजनीति करते है
सत्ता की सीढ़ी पर चढ़ते तो होंगे
पैदल चलने पर थकते तो होंगे ।
शर्म करो थोड़ी से धर्म रक्षा करो।
आत्मा की शांति के लिए कलश एक जगह प्रवाहित करो ।









