रविवार, 1 जुलाई 2018

कभो वो कृष्णा सा हँसा जाता है

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कभी तुम राधा सी रूठती हो
कभी मैं श्याम स मनाता हूं
कभी तुम सीता सी बिछड़ जाती हो
कभी में राम से ढूंढ़ता हु
कभी कोई रावण सा छीन लेता है
कभी हनुमान सा मिला देता है
कभी द्रोपदी सा चीर हरण होता है
कभी कोई कृष्ण सा बचा लेता है ।
कभी तुम उत्तरा से रोती हुई आती हो
कभो वो कृष्णा सा हँसा जाता है

तुम ही मेरे राम हो तुम ही मेरे श्याम हो
तुम बिन जीवन की राहे सूनसान है ।

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